पित्त की थैली खराब होने से क्या होता है?HealthPlanet

Posted on Mon 5th Dec 2022 : 11:01

संपूर्ण आबादी में से 9 से 17 प्रतिशत लोगों में गॉल ब्लैडर स्टोन के लक्षण पाए जाते हैं। गॉल ब्लैडर स्टोन के मामले पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। अमूमन यह रोग 30 से 50 साल की महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है। महिलाओं में जहां इस रोग की उपस्थिति तीन गुना ज्यादा होती है, वहीं दक्षिण भारत की तुलना में उत्तरी और मध्य भारत के लोगों में सात गुना ज्यादा देखी गई है।
कारण - पित्त की पथरी बनने का कारण अभी तक बहुत स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन कम कैलोरी, तेजी से वजन घटाने वाले भोजन तथा लंबे समय तक भूखे रहने से गॉल ब्लैडर सिकुड़ना बंद हो जाता है और इस वजह से इसमें पथरी विकसित होने लगती है। पित्तपथरी और मोटापा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन तथा हाइपरकोलेस्टेरोलेमिया जैसे लाइफस्टाइल रोगों के बीच एक गहरा ताल्लुक होता है।

लक्षण- सामान्यतया गॉल ब्लैडर स्टोन के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। अगर पित्त की थैली में इंफेक्शन हो जाए या स्टोन नली में फंस जाता है तो पेट के ऊपरी दाएं भाग में दर्द होना, छाती की हड्‌डी के नीचे, पेट के बीच में अचानक तेज और गहरा दर्द होना, कमरदर्द और दाएं कंधे में दर्द होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गॉल स्टोन का दर्द कुछ मिनटों से लेकर कुछ दिनों तक हो सकता है।
गॉल ब्लैडर स्टोन होने के नतीजे बहुत गंभीर भी होते हैं और कई बार ये जान के लिए खतरा भी बन जाते हैं।
1. पित्त की नली में पथरी होने से पीलिया और गंभीर सर्जिकल स्थिति भी उभर सकती है।
2. इससे संक्रमण, मवाद बनने और गॉल ब्लैडर में छेद होने के कारण पेरिटनाइटिस (पेट की झिल्ली का रोग) भी सकता है।
3. पेनक्रियाटाइटिस जैसी जानलेवा स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
4. गॉल ब्लैडर में कैंसर हो सकता है। इस स्टोन से पीड़ित मरीजों के 6 से 18 प्रतिशत मामलों में आजीवन कैंसर पनपने का खतरा रहता है जो खासतौर पर उत्तर भारत में ज्यादा देखे गए हैं।

बड़ी पथरियों से पीड़ित मरीजों में कैंसर विकसित होने की आशंका ज्यादा रहती है जबकि छोटी पथरियों से पीड़ितों में पीलिया या पेनक्रियाटाइटिस के मामले ज्यादा होते हैं।
गॉल ब्लैडर स्टोन के जानलेवा लक्षणों को देखते हुए हमेशा यही सलाह दी जाती है कि लक्षणों का इंतजार किए बगैर रोग का पता चलते ही इसकी सर्जरी करा लें। चाहे लक्षण बहुत हल्के भी क्यों न नजर आएं। अपने पेट के अंदर विस्फोटक लेकर न चलें।
अगर आपको गॉल ब्लैडर स्टोन के निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तब बिना देर किए डॉक्टर को दिखाएं-
> पेट में दर्द इतना तेज होता है कि आप सीधे नहीं बैठ सकें।
> त्वचा और आंखों के सफेद भाग का पीला पड़ जाना।
> पेट में दर्द के साथ ठंड लगकर तेज बुखार आना या उल्टी आना उपचार।
इस रोग को पेट की अल्ट्रासॉनिक जांच से आसानी से पहचाना जा सकता है। रोग का पता लगने के बाद इसका एकमात्र इलाज सर्जरी है। सर्जरी के द्वारा स्टोन के साथ गॉल ब्लैडर को भी निकाल दिया जाता है, क्योंकि अगर इसे न निकाला जाए तो इसमें फिर से स्टोन विकसित हो सकता है।
गॉल ब्लैडर को निकालने के लिए की जाने वाली लेप्रोस्कोपी सर्जरी को कोलेसिस्टेक्टॉमी कहते हैं। इसके द्वारा सर्जरी कराने पर मरीज को अस्पताल में सिर्फ एक या दो दिन रहना पड़ता है। गॉल ब्लैडर निकालने से हमारे पाचन तंत्र पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है, क्योंकि गॉल ब्लैडर में पित्त एकत्रित हुए बगैर भी आंत तक पहुंचता रहता है। किडनी स्टोन के मामले में ज्यादातर पथरी दवाइयों के सेवन से ही निकल जाती है, लेकिन गॉल ब्लैडर स्टोन सहजता से नहीं निकलता है। इसलिए गॉल ब्लैडर स्टोन को किडनी स्टोन नहीं समझना चाहिए।
रोकथाम और सावधानियां- अनाज, प्रोटीन और वसा का संतुलित सेवन करें। सेचुरेटेड फैट का सेवन कम से कम करें, जैसे - मीट, जमे हुए घी, वनस्पति घी, मक्खन आदि। खट्टे और कड़वे खाद्य पदार्थों का भी सेवन करें ये पाचन में सहायता करते हैं।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info