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संपूरà¥à¤£ आबादी में से 9 से 17 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ लोगों में गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£ पाठजाते हैं। गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के मामले पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में तेजी से बॠरहे हैं। अमूमन यह रोग 30 से 50 साल की महिलाओं में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पाया जाता है। महिलाओं में जहां इस रोग की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तीन गà¥à¤¨à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है, वहीं दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में उतà¥à¤¤à¤°à¥€ और मधà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के लोगों में सात गà¥à¤¨à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखी गई है।
कारण - पितà¥à¤¤ की पथरी बनने का कारण अà¤à¥€ तक बहà¥à¤¤ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ नहीं हो पाया है लेकिन कम कैलोरी, तेजी से वजन घटाने वाले à¤à¥‹à¤œà¤¨ तथा लंबे समय तक à¤à¥‚खे रहने से गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¤¾ बंद हो जाता है और इस वजह से इसमें पथरी विकसित होने लगती है। पितà¥à¤¤à¤ªà¤¥à¤°à¥€ और मोटापा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन तथा हाइपरकोलेसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤²à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ जैसे लाइफसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤² रोगों के बीच à¤à¤• गहरा तालà¥à¤²à¥à¤• होता है।
लकà¥à¤·à¤£- सामानà¥à¤¯à¤¤à¤¯à¤¾ गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के कोई लकà¥à¤·à¤£ दिखाई नहीं देते हैं। अगर पितà¥à¤¤ की थैली में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ हो जाठया सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ नली में फंस जाता है तो पेट के ऊपरी दाà¤à¤‚ à¤à¤¾à¤— में दरà¥à¤¦ होना, छाती की हडà¥â€Œà¤¡à¥€ के नीचे, पेट के बीच में अचानक तेज और गहरा दरà¥à¤¦ होना, कमरदरà¥à¤¦ और दाà¤à¤‚ कंधे में दरà¥à¤¦ होना जैसे लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते हैं। गॉल सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ का दरà¥à¤¦ कà¥à¤› मिनटों से लेकर कà¥à¤› दिनों तक हो सकता है।
गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ होने के नतीजे बहà¥à¤¤ गंà¤à¥€à¤° à¤à¥€ होते हैं और कई बार ये जान के लिठखतरा à¤à¥€ बन जाते हैं।
1. पितà¥à¤¤ की नली में पथरी होने से पीलिया और गंà¤à¥€à¤° सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ उà¤à¤° सकती है।
2. इससे संकà¥à¤°à¤®à¤£, मवाद बनने और गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में छेद होने के कारण पेरिटनाइटिस (पेट की à¤à¤¿à¤²à¥à¤²à¥€ का रोग) à¤à¥€ सकता है।
3. पेनकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ जैसी जानलेवा सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो सकती है।
4. गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में कैंसर हो सकता है। इस सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ से पीड़ित मरीजों के 6 से 18 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ मामलों में आजीवन कैंसर पनपने का खतरा रहता है जो खासतौर पर उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखे गठहैं।
बड़ी पथरियों से पीड़ित मरीजों में कैंसर विकसित होने की आशंका जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रहती है जबकि छोटी पथरियों से पीड़ितों में पीलिया या पेनकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के मामले जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होते हैं।
गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के जानलेवा लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को देखते हà¥à¤ हमेशा यही सलाह दी जाती है कि लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का इंतजार किठबगैर रोग का पता चलते ही इसकी सरà¥à¤œà¤°à¥€ करा लें। चाहे लकà¥à¤·à¤£ बहà¥à¤¤ हलà¥à¤•े à¤à¥€ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न नजर आà¤à¤‚। अपने पेट के अंदर विसà¥à¤«à¥‹à¤Ÿà¤• लेकर न चलें।
अगर आपको गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित लकà¥à¤·à¤£ दिखाई दें तब बिना देर किठडॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚-
> पेट में दरà¥à¤¦ इतना तेज होता है कि आप सीधे नहीं बैठसकें।
> तà¥à¤µà¤šà¤¾ और आंखों के सफेद à¤à¤¾à¤— का पीला पड़ जाना।
> पेट में दरà¥à¤¦ के साथ ठंड लगकर तेज बà¥à¤–ार आना या उलà¥à¤Ÿà¥€ आना उपचार।
इस रोग को पेट की अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¥‰à¤¨à¤¿à¤• जांच से आसानी से पहचाना जा सकता है। रोग का पता लगने के बाद इसका à¤à¤•मातà¥à¤° इलाज सरà¥à¤œà¤°à¥€ है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के साथ गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° को à¤à¥€ निकाल दिया जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अगर इसे न निकाला जाठतो इसमें फिर से सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ विकसित हो सकता है।
गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° को निकालने के लिठकी जाने वाली लेपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी सरà¥à¤œà¤°à¥€ को कोलेसिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‰à¤®à¥€ कहते हैं। इसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सरà¥à¤œà¤°à¥€ कराने पर मरीज को असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में सिरà¥à¤« à¤à¤• या दो दिन रहना पड़ता है। गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° निकालने से हमारे पाचन तंतà¥à¤° पर कोई दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ नहीं पड़ता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° में पितà¥à¤¤ à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ हà¥à¤ बगैर à¤à¥€ आंत तक पहà¥à¤‚चता रहता है। किडनी सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ के मामले में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° पथरी दवाइयों के सेवन से ही निकल जाती है, लेकिन गॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ सहजता से नहीं निकलता है। इसलिठगॉल बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ को किडनी सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ नहीं समà¤à¤¨à¤¾ चाहिà¤à¥¤
रोकथाम और सावधानियां- अनाज, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और वसा का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ सेवन करें। सेचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ फैट का सेवन कम से कम करें, जैसे - मीट, जमे हà¥à¤ घी, वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ घी, मकà¥à¤–न आदि। खटà¥à¤Ÿà¥‡ और कड़वे खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का à¤à¥€ सेवन करें ये पाचन में सहायता करते हैं।
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